Friday, May 24, 2013

"बेटी" पर एक कविता/मेरी बेटी शाम्भवी का कविता-पाठ


      मित्रों ! आपने मेरी रचनाओं को तो पसन्द किया ही है, पर आज मैं आपको अपनी बेटी की आवाज़ से रूबरू कराना चाहता हूँ। वैसे तो माँ-बाप को अपनी सन्तान सबसे अच्छी लगती ही है पर अगर वह मेरी बेटी जैसी हो तो फिर क्या कहना। आप देंखे, सुनें और अवश्य बतायें कि उसने मेरी पिछले पोस्ट की कविता के साथ कितना न्याय किया है.......

         PLEASE CLICK HERE :-     मेरी बेटी शाम्भवी का कविता-पाठ
                     (यह उसी प्रतियोगिता की रिकार्डिंग है जिसका ज़िक्र नीचे आया है।)


  आप यही रचना पिछले पोस्ट में नीचे पढ़ सकते हैं ......

Monday, May 20, 2013

बचा लो बेटियाँ अपनी/कविता

मित्रों ! दिल्ली की वारदातों और देश भर में ऐसी ही घटनाओं ने मुझे किसी नई रचना को जन्म देने से रोक रखा था क्योंकि मैं अपने  हृदय की गहराइयों से स्वयं को बहुत ही दुखी महसूस कर रहा था। संयोग से मेरी बेटी को एक संस्था द्वारा आयोजित "बेटी बचाओ नशा छुड़ाओ" विषय पर कविता प्रतियोगिता में भाग लेने के लिये एक कविता की आवश्यकता पड़ी तो मेरे कलम खुद-ब-खुद लिखते गये और यह कविता बन गयी। बेटी ने भी प्रथम पुरस्कार पाकर इस कविता को सार्थक किया। आशा है आप को भी ये अच्छी लगेगी.....

सृष्टि ही मार डालोगे, तो होगी सर्जना फिर क्या ?
बचा लो बेटियाँ अपनी, पड़ेगा तड़पना फिर क्या ?

डरी-सहमी सी रहती है, नहीं ये कुछ भी कहती है,
मगर बेटों से ज्यादा पूरे अपने फर्ज़ करती है,

बढ़ाती वंश जो दुनियां में उसको मारना फिर क्या ?
बचा लो बेटियाँ अपनी, पड़ेगा तड़पना फिर क्या ?


 अगर बेटी नहीं होगी, बहू तुम कैसे लाओगे,
बहन, माँ, दादी, नानी के, ये रिश्ते कैसे पाओगे,
बताओ माँ के ममता की करोगे कल्पना फिर क्या ?

बचा लो बेटियाँ अपनी, पड़ेगा तड़पना फिर क्या ?

 जब तलक मायके में है, वहाँ की आन होती है,
और ससुराल जब जाती, वहाँ की शान होती है,
बेटियाँ दो कुलों की लाज रखती सोचना फिर क्या ?

बचा लो बेटियाँ अपनी, पड़ेगा तड़पना फिर क्या ?

कोई प्रतियोगिता हो टाप करती है तो बेटी ही,
किसी भी फर्ज़ से इन्साफ़ करती है तो बेटी ही,
ये है माँ- बाप के आँखों की पुतली फोड़ना फिर क्या ?

बचा लो बेटियाँ अपनी, पड़ेगा तड़पना फिर क्या ?

कई बेटे तो अपने फर्ज़ से ही ऊब जाते हैं,
कई बेटे हैं ऐसे जो नशे में डूब जाते हैं,
 
नशे से पुत्र बच जाए भ्रुणों से पुत्रियाँ फिर क्या ?
बचा लो बेटियाँ अपनी, पड़ेगा तड़पना फिर क्या ?

Saturday, February 16, 2013

खूबसूरत दक्षिणी अभिनेत्रियाँ

मित्रों ! फिल्मी दुनियाँ में दक्षिणी अभिनेत्रियों का बोलबाला शुरु से रहा है। उनकी खूबसूरती के चर्चे हिन्दी फिल्म संसार में भी होते रहे हैं। वैजयन्ती-माला, वहीदा रहमान, हेमामालिनी, रेखा, श्रीदेवी, जयाप्रदा, माधुरी दीक्षित आदि अभिनेत्रियों ने हिन्दी फिल्मों के दर्शकों के दिलों पर राज किया है । आज भी श्रिया सरन, अनुष्का शेट्टी, असिन, तमन्ना, इलियाना, चार्मी, काजल अग्रवाल आदि हीरोइनें फिर से हिन्दी फिल्मों में वही मुकाम  चाहती हैं जो कभी पुरानी अभिनेत्रियों ने पाया था। देखते हैं इनमें से कौन पूरे भारत के दर्शकों के दिलों पर राज कर पाती है।

 
श्रिया सरन     
     
   
 अनुष्का शेट्टी 

  
असिन

  
काजल अग्रवाल 

  
चार्मी

Monday, January 14, 2013

तू मुझको याद रखना/pbchaturvedi

यह पूर्वप्रकाशित रचना पहले भी 2009 में  मैं अपने ब्लाग पर डाल चुका हूँ । हालांकि आडियो क्वालिटी इतनी अच्छी नहीं है क्योंकि यह मोबाइल से रिकार्ड किया गया है । आज इस पूर्वप्रकाशित रचना को यहाँ लिखकर और अपनी आवाज़ में प्रस्तुत कर रहा हूँ...

तू मुझको याद रखना, मेरी बात याद रखना।
गुजरे जो खूबसूरत, लम्हात याद रखना।


बादल बरसने वाले, आँखों में जब भी छाए;
मेरे साथ भींगने की, बरसात याद रखना।


तुमसे जुदा हो जाऊं, मैं कब ये चाहता था;
काबू में नहीं होते, हालात याद रखना।


ग़मगीन तुम न होना, कभी इन जुदाइयों से;
मैं हूँ तुम्हारे दिल में तेरे साथ याद रखना।


नहीं आ सकूंगा मैं तो, तेरे पास ग़म न करना,
तू अपने मुहब्बत की, सौगात याद रखना।


मेंहदी लगी न तुझको, सेहरा न मैंने बाँधा;
तो क्या हुआ यादों की, बारात याद रखना।


आप आवाज़ यहाँ सुन सकते हैं...
तू मुझको याद रखना/pbchaturvedi/Audio 

आप यू-ट्यूब पर यहाँ सुन सकते हैं...

Wednesday, December 19, 2012

डंकन फ़्लेचर क्यों?

                                                             Photo from znn.india.com
       दोस्तों ! भारतीय क्रिकेट आज जितना नीचे जा चुका है, वह किसी से छुपा नहीं है। लेकिन मूल कारण क्या है इस पर चर्चा बहुत ही कम होती है। वह कारण है भारतीय टीम का कोच। भारत ने विदेशी कोच रखने का जो सिलसिला प्रारम्भ किया है वह कुछ समय के लिये तो ठीक था परन्तु हमेशा के लिये ठीक नहीं है। सभी विदेशी कोच अच्छी नीयत के साथ भारत नहीं आते। इसका सबसे बढ़िया उदाहरण ग्रेग चैपल हैं। अपने कोच रहते ग्रेग चैपल अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि भारत की लुटिया पूरी तरह से डुबो दी जाए। टीम के सदस्यों में आपसी मनमुटाव को बढ़ावा देना, अच्छे खिलाड़ियों की गेंदबाजी या बल्लेबाजी बिगाड़ना, भारतीय क्रिकेट को रसातल में ले जाना इत्यादि ये सभी ग्रेग चैपल की प्राथमिकताएं थी जिसे काफी हद तक उन्होंने पूरा किया। अब यही काम डंकन फ्लेचर कर रहे हैं। गैरी कर्स्टेन इसके अपवाद थे और टीम का प्रदर्शन भी उस समय अच्छा था इसलिए वो बच गये। मेरे विचार से भारत का कोच किसी भारतीय को ही होना चाहिए क्योंकि भारतीय कोच ही यहाँ के खिलाड़ियों की भावना को और खेल में हार-जीत की वजह से पूरे भारत की जनता की भावना को समझ सकता है और उसका उपाय ढूंढ सकता है। विदेशी कोच तो बस पैसे के लिए यहाँ आते हैं और अपना उल्लू सीधा कर चलते बनते हैं, उनकी कोई जवाबदेही भी नहीं बनती।  है कि नहीं ! आप का विचार क्या है ?

Saturday, December 15, 2012

वन-टू का फ़ोर, फ़ोर-टू का वन

मित्रों ! जैसे-जैसे समय बीत रहा है हम सभी ब्लागरों को ज्ञान प्राप्त हो रहा है कि कई-कई ब्लागों से अच्छा है एक ही ब्लाग होना। मैंने भी अब केवल दो ब्लाग रखने का फैसला किया है- एक अपनी रचनाओं के लिए और एक भारत के दूसरे विभिन्न रचनाकारों के लिए। अपने अन्य रचनाकारों के लिये मौजूद दो ब्लागों "समकालीन ग़ज़ल" और "बनारस के कवि और शायर" को मिलाकर एक ब्लाग मे समाहित कर मैंने ये ब्लाग "गीत,ग़ज़ल,कविता की दुनिया"  बनाया है। सबसे पहले दोनो ब्लागों के पुराने पोस्ट मैंने इस पर पोस्ट किया है। आशा है आप को भी सुविधा होगी......

Sunday, December 9, 2012

एक रोमांटिक रचना/सुनने के लिए है न सुनाने के लिए है

प्रस्तुत है एक रोमांटिक रचना जिसे मैं पहले भी पोस्ट कर चुका हूँ पर इस बार अपनी आवाज़ में इसे प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा है आप को ये रचना अवश्य भायेगी....
अपनी ये रचना मैं स्वर्गीय मोहम्मद सलीम राही को समर्पित करता हूँ जो आकाशवाणी वाराणसी में कार्यरत थे और एक अच्छे शायर थे। उन्होंने मेरी ग़ज़लों को बहुत सराहा और ये रचना उन्हें बहुत अच्छी लगती थी। इसको उन्हीं की वजह से सेतु [ एक संस्था जिसमें संगीतमय प्रस्तुति होती थी ] में शामिल किया गया था और इसे वहाँ ambika keshari ने अपनी आवाज़ दी थी।
                                                  यू-ट्यूब पर सुनने के लिये यहाँ क्लिक करें-
  
आडियो सुनने के लिये यहाँ क्लिक करें-
http://www.divshare.com/download/21387297-0f7

सुनने के लिए है न सुनाने के लिए है ।
ये बात अभी सबसे छुपाने के लिए है ।

दुनिया के बाज़ार में बेचो न इसे तुम ,
ये बात अभी दिल के खजाने के लिए है ।

इस बात की चिंगारी अगर फ़ैल गयी तो ,
तैयार जहाँ आग लगाने के लिए है ।

आंसू कभी आ जाए तो जाहिर न ये करना ,
ये गम तेरा मुझ जैसे दीवाने के लिए है ।

होता रहा है होगा अभी प्यार पे सितम ,
ये बात जमानों से ज़माने के लिए है ।

तुम प्यार की बातों को जुबां से नहीं कहना ,
ये बात निगाहों से बताने के लिए है ।

Friday, August 10, 2012

दर्शन दो प्रभु कबसे खड़े हैं


आप सभी को भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की बहुत-बहुत बधाई। आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर मैं अपना लिखा एक भजन प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह भजन पहले लिखित रूप में आप तक पहुँच चुका है, आज अपनी आवाज़ मे आप तक पहुँचा रहा हूँ...

          अगर ऊपर यू ट्यूब में कोई समस्या हो तो इस रिकार्डिंग को आप यहाँ भी देख और सुन सकते हैं...
                           http://www.youtube.com/watch?v=HWOSBUGICaw&feature=plcp


दर्शन दो प्रभु कबसे खड़े हैं।
हम भारी विपदा में पड़े हैं।

कोई नहीं प्रभु-सा रखवाला,
मेरे कष्ट मिटाने वाला,
जीवन में कर दीजै उजाला;
आप दयालू नाथ बड़े हैं.......

झूठी माया झूठी काया,
लेकर मैं दुनिया में आया,
दुनिया में है पाप समाया;
भरते पाप के रोज़ घड़े हैं........

पाप हटे मिट जाये बुराई,
सबमें पडे़ प्रभु आप दिखाई,
इच्छाओं ने दौड़ लगाई;
कितनी गहरी मन की जड़े है.......

Thursday, July 19, 2012

राग - रामकली

मित्रों ! आइए आपको राग रामकली से परिचय कराता हूँ...

राग - रामकली
थाट- भैरव
जाति- षाडव-वक्र-सम्पूर्ण
वादी-
प

संवादी- सा

न्यास-स्वर :- प
आरोह :- सा ग म प, ध नि सां ।
अवरोह :- सां नि ध  प, म’ प ध  नि ध  प, ग म रे सा ।
पकड़ :- म’ प ध नि ध प, ग म रे सा ।
तान स्थायी :-
१.        निसा गम पप म’प । धप मग रेसा निसा।
२.       निसा गम पध निसा। धनि धप म’ग गम।
३.       सांरें सांनि धप धनि । धप मप गम पध । सांनि धप धप म’प। गम पम गरे सा-।
४.       गंगं रेंगं गंरें सांनि। धप रेंरें सांरें रेंसां। निनि धप मग रेसा । निसा गग पध मप। गम पप मग रेसा।
तान अन्तरा :-
१.      रेंसां रेंसां निध पग। गम’ पध निसां रेंसां।
२.      निसा गम पध निसां। रेंगं गंगं रेंसां रेंसां। निध पम’ धनि सां-।
३.      म’प धनि धप मप । गम पध सांनि धप । म’प धनि सांनि धप।धनि सांरें गंगं रेंसां। रेंसां धप धनि सां।

 

Saturday, June 2, 2012

तूने आने में की जो देरी तो

दोस्तों! आज एक रोमांटिक रचना के साथ प्रस्तुत हूँ। यह रचना साहित्यिक नहीं है बल्कि एक साधारण रचना है जो संगीत के साथ ही अच्छी लगेगी। आशा है हमेशा की तरह आप इसे भी जरूर पसन्द करेंगे...
              अगर ऊपर यू ट्यूब में कोई समस्या हो तो इस रिकार्डिंग को आप यहाँ भी देख और सुन सकते हैं...
                                http://www.youtube.com/watch?v=bS5sHa4-rDg&feature=plcp

                           तूने आने में की जो देरी तो।
                           याद आने लगेगी तेरी तो।

                           मैं इल्जाम तुम्हें ही दूंगा,
                           मेरी दुनिया हुई अंधेरी तो।

                            ढूंढता हूँ तुझे मंजिल-मंजिल,
                            ख़त्म होगी कभी ये फेरी तो।

                            करूँगा और इन्तज़ार अगर,
                            जान जाने लगेगी मेरी तो।

 आजकल फ़ायर फ़ाक्स में यू-ट्यूब काम नहीं कर रहा, इसलिये आप से ये अनुरोध है की आप इसे गूगल क्रोम में देखने का कष्ट करें....