Monday, May 12, 2014

आप की जब थी जरूरत आप ने धोखा दिया

मित्रों ! एक रचना अपनी आवाज में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे आप पहले पढ़ चुके हैं , इस रचना का संगीत-संयोजन भी मैंने किया है | आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें ताकि आप मेरी ऐसी रचनाएं पुन: देख और सुन सकें | आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि आप इस रचना को अवश्य पसंद करेंगे |
इस रचना का असली आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...

                                              सुनिए एक नई आडियो रिकार्डिंग

22 comments:

  1. बहुत खूब..सुंदर प्रस्तुति..

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  2. खुबसूरत गजल लिखा आपने ,धन्यवाद

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  3. दिल में रहकर आप का ये दिल हमारा तोडना ..
    बहुत सुन्दर भाव ...काश लोग एक दूजे के दिलों को समझें ...
    भ्रमर ५

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  4. बहुत खुबसुरत गजल

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  5. बहुत सुन्दर मित्र।
    चर्चा में लेने के लिए मजबूर हैं।
    आपका मैटर सलेक्ट नहीं होता है।
    इसका ताला खोलिए मान्यवर।

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  6. बधाई भाई ,
    बेहद खूबसूरत ग़ज़ल , गुनगुनाने लायक !

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  7. This comment has been removed by the author.

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  8. बहुत ही खूबसूरत और सुन्दर प्रस्तुति !!

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  9. bahut khoob gazal aur sangeet dono
    badhai
    rachana

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  10. बेवफ़ा होते हैं अक्सर, हुश्नवाले ये सभी;
    जिन्दगी ने ली नसीहत, आप ने धोखा दिया।

    Bahut khoob !

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  11. सुन्दर धुन में पिरोया है आपने रचना को. पर आप पर विश्वास रखिये. भविष्य में अच्छा ही देखने को मिलेगा.

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    1. आप किस "आप" की बात कर रहे हैं ? ये रचना बहुत पुरानी है और पहले भी मेरे ब्लॉग पर आ चुकी है....

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    2. बहुत ही खूबसूरत और सुन्दर प्रस्तुति !!

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  12. वाह! बहुत खूब संगीत संयोजन और ग़ज़ल भी बढ़िया.

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    1. This comment has been removed by a blog administrator.

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    2. अल्पना जी, सुझाव के लिए धन्यवाद | आगे रिकार्डिंग में मैं इन बातों और बीट्स के वाल्यूम का ध्यान रखूंगा......

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  13. क्या बात है...बहुत उम्दा!! आनन्द आया.

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  14. बेवफ़ा होते हैं अक्सर, हुश्नवाले ये सभी;
    जिन्दगी ने ली नसीहत, आप ने धोखा दिया।
    क्या बात है !

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