Sunday, August 10, 2014

जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ /pbchaturvedi

मित्रों ! एक पूर्वप्रकाशित रचना अपनी आवाज में प्रस्तुत कर रहा हूँ , इस रचना का संगीत-संयोजन और चित्र-संयोजन भी मैंने किया है | आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें ताकि आप मेरी ऐसी रचनाएं पुन: देख और सुन सकें | आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि आप इस रचना को अवश्य पसंद करेंगे |
इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...

27 comments:

  1. बेहद खुबसूरत रचना और लाजबाब लगा स्वर में सुनना
    राखी की असीम शुभ कामनायें

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  2. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, स्वर तो लाजबाब है.

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  3. सुन्दर ग़ज़ल और गायकी ,बहुत- बहुत बधाई आपको

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  4. वाह बेहतरीन रचना की खुबसूरत प्रस्तुति ... बधाई एवं शुभकामनाये :)

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  5. बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल और उसकी लाज़वाब प्रस्तुति...

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  6. वाह वाह ! सचमुच मज़ा आ गया !

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  7. ऊपर वाला भी कुछ सोचे,
    मैं ही क्योंकर अपना सोचूँ।
    अंततः सब ऊपर वाले के हाथ में ही होता है..... इसलिए हम भी सिर्फ अपने लिए ही क्यों सोचें......बहुत सुन्दर सकारात्मक प्रस्तुति

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  8. बातों की तलवार चलाए,
    कैसे उसको अपना सोचूँ।
    बहुत खूबसूरत शब्द

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  9. आपकी आवाज़ भी चार चाँद लगा रही है इस खूबसूरत ग़ज़ल में ...
    मज़ा आया बहुत ही ...

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  10. ऊपर वाला भी कुछ सोचे,
    मैं ही क्योंकर अपना सोचूँ।
    वाह बेहतरीन

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  11. सुन्दर ग़ज़ल और गायकी

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  12. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

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  13. उम्दा गजल.... बहुत खूब

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  14. बहुत खुबसुरत .....सुनने में और खुबसुरत लगी

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  15. बहुत सुन्दर गजल, दिल की गहराई का वर्णन

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  16. वाह बहुत सुन्दर लिखा पंडित जी । बधाई।

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  17. सुन्दर शब्दों में सम्प्रेषणीय गज़ल । प्रशंसनीय प्रस्तुति ।

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  18. ऊपर वाला भी कुछ सोचे,
    मैं ही क्योंकर अपना सोचूँ।
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

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  19. बहुत खूबसूरत ग़ज़ल और धुन, बधाई.

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  20. सुन्दर ग़ज़ल एवं आवाज़ ....पर

    बालिग होकर ये मुश्किल है, .. पर सोचना तो वालिग़ होकर ही पड़ता है ...नाचापन में कौन सोचता है.......
    -----ऊपर वाला तो सदा सोच विचार कर ही करता है ...सोचना तो नानाव को ही है उसी को....

    जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ। ...

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