लीजिए इस बार एक अंग्रेजी गीत सुनिए जिसे गाया है मेरी बेटी शाम्भवी ने...
Sunday, November 10, 2013
Friday, November 8, 2013
दो छठ-गीत
मित्रों ! छठ-पर्व के अवसर पर दो छठ-गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ | पहला गीत लिखा है मेरी माँ श्रीमती शैलकुमारी ने और दोनों गीतों को स्वर दिया है मेरी धर्मपत्नी श्रीमती कंचनलता और मेरी पुत्री शाम्भवी ने ....
Sunday, October 27, 2013
Tuesday, June 25, 2013
मानवता अब तार-तार है
मित्रों ! उत्तराखंड की घटना ने एक ऐसा घाव छोड़ा है जो शायद बरसों तक नहीं भर सकता | सबसे ज्यादा दुःख तो तब हुआ जब उस समय की कई घटनाओं के बारे में पता चला | कोई पानी बिना मर रहा था और कुछ लोग उस समय पानी का सौदा कर रहे थे और २०० रुपये अधिक दाम एक बोतल पानी का वसूल रहे थे | कुछ उस समय लाशों पर से गहने उतार रहे थे, और इसके लिए उन्होनें उन शवों की उंगलियाँ काटने से गुरेज नहीं किया | उनके सामने कई लोग मदद के लिए पुकार रहे थे मगर उन्होंने उन्हें अनसुना कर अपना काम जारी रखा | क्या हो गया है हमारे समाज को ? मानवता को ? कुछ पंक्तियाँ अपने–आप होंठ गुनगुनाते गए जिन्हें मैं आप को प्रेषित कर रहा हूँ |
बीते पल ये कहते गुजरे, संभलो आगे और पतन है |
लुटे हुए को लूट रहे हैं, मरे हुए को काट रहे हैं;
कुछ ऐसे हैं आफ़त में भी; रुपये, गहने छांट रहे हैं;
मरते रहे कई पानी बिन, वे अपने धंधे में मगन हैं......
जो शासक हैं देख रहे हैं, उनको बस अपनी चिंता है;
मरती है तो मर जाए ये, ये जनता है वो नेता हैं;
आग लगाने खड़े हुए हैं जनता ओढ़े हुए कफ़न है...
भर जाते हैं घाव बदन के, मन के जख्म नहीं भरते;
आफ़त ही ये ऐसी आई, करते भी तो क्या करते;
क्या वे फिर से तीर्थ करेंगे, उजड़ा जिनका ये जीवन है...
Friday, May 24, 2013
"बेटी" पर एक कविता/मेरी बेटी शाम्भवी का कविता-पाठ
मित्रों ! आपने मेरी रचनाओं को तो पसन्द किया ही है, पर आज मैं आपको अपनी बेटी की आवाज़ से रूबरू कराना चाहता हूँ। वैसे तो माँ-बाप को अपनी सन्तान सबसे अच्छी लगती ही है पर अगर वह मेरी बेटी जैसी हो तो फिर क्या कहना। आप देंखे, सुनें और अवश्य बतायें कि उसने मेरी पिछले पोस्ट की कविता के साथ कितना न्याय किया है.......
(यह उसी प्रतियोगिता की रिकार्डिंग है जिसका ज़िक्र नीचे आया है।)
आप यही रचना पिछले पोस्ट में नीचे पढ़ सकते हैं ......
Monday, May 20, 2013
बचा लो बेटियाँ अपनी/कविता
मित्रों ! दिल्ली की वारदातों और देश भर में ऐसी ही घटनाओं ने मुझे किसी नई रचना को जन्म देने से रोक रखा था क्योंकि मैं अपने हृदय की गहराइयों से स्वयं को बहुत ही दुखी महसूस कर रहा था। संयोग से मेरी बेटी को एक संस्था द्वारा आयोजित "बेटी बचाओ नशा छुड़ाओ" विषय पर कविता प्रतियोगिता में भाग लेने के लिये एक कविता की आवश्यकता पड़ी तो मेरे कलम खुद-ब-खुद लिखते गये और यह कविता बन गयी। बेटी ने भी प्रथम पुरस्कार पाकर इस कविता को सार्थक किया। आशा है आप को भी ये अच्छी लगेगी.....
सृष्टि ही मार डालोगे, तो होगी सर्जना फिर क्या ?
बचा लो बेटियाँ अपनी, पड़ेगा तड़पना फिर क्या ?
डरी-सहमी सी रहती है, नहीं ये कुछ भी कहती है,
मगर बेटों से ज्यादा पूरे अपने फर्ज़ करती है,
बढ़ाती वंश जो दुनियां में उसको मारना फिर क्या ?
बचा लो बेटियाँ अपनी, पड़ेगा तड़पना फिर क्या ?
अगर बेटी नहीं होगी, बहू तुम कैसे लाओगे,
बहन, माँ, दादी, नानी के, ये रिश्ते कैसे पाओगे,
बताओ माँ के ममता की करोगे कल्पना फिर क्या ?
बचा लो बेटियाँ अपनी, पड़ेगा तड़पना फिर क्या ?
जब तलक मायके में है, वहाँ की आन होती है,
और ससुराल जब जाती, वहाँ की शान होती है,
बेटियाँ दो कुलों की लाज रखती सोचना फिर क्या ?
बचा लो बेटियाँ अपनी, पड़ेगा तड़पना फिर क्या ?
कोई प्रतियोगिता हो टाप करती है तो बेटी ही,
किसी भी फर्ज़ से इन्साफ़ करती है तो बेटी ही,
ये है माँ- बाप के आँखों की पुतली फोड़ना फिर क्या ?
बचा लो बेटियाँ अपनी, पड़ेगा तड़पना फिर क्या ?
कई बेटे तो अपने फर्ज़ से ही ऊब जाते हैं,
कई बेटे हैं ऐसे जो नशे में डूब जाते हैं,
नशे से पुत्र बच जाए भ्रुणों से पुत्रियाँ फिर क्या ?
बचा लो बेटियाँ अपनी, पड़ेगा तड़पना फिर क्या ?
Saturday, February 16, 2013
खूबसूरत दक्षिणी अभिनेत्रियाँ
मित्रों ! फिल्मी दुनियाँ में दक्षिणी अभिनेत्रियों का बोलबाला शुरु से रहा है। उनकी खूबसूरती के चर्चे हिन्दी फिल्म संसार में भी होते रहे हैं। वैजयन्ती-माला, वहीदा रहमान, हेमामालिनी, रेखा, श्रीदेवी, जयाप्रदा, माधुरी दीक्षित आदि अभिनेत्रियों ने हिन्दी फिल्मों के दर्शकों के दिलों पर राज किया है । आज भी श्रिया सरन, अनुष्का शेट्टी, असिन, तमन्ना, इलियाना, चार्मी, काजल अग्रवाल आदि हीरोइनें फिर से हिन्दी फिल्मों में वही मुकाम चाहती हैं जो कभी पुरानी अभिनेत्रियों ने पाया था। देखते हैं इनमें से कौन पूरे भारत के दर्शकों के दिलों पर राज कर पाती है।
अनुष्का शेट्टी
असिन
काजल अग्रवाल
चार्मी
Monday, January 14, 2013
तू मुझको याद रखना/pbchaturvedi
यह पूर्वप्रकाशित रचना पहले भी 2009 में मैं अपने ब्लाग पर डाल चुका हूँ । हालांकि आडियो क्वालिटी इतनी अच्छी नहीं है क्योंकि यह मोबाइल से रिकार्ड किया गया है । आज इस पूर्वप्रकाशित रचना को यहाँ लिखकर और अपनी आवाज़ में प्रस्तुत कर रहा हूँ...
गुजरे जो खूबसूरत, लम्हात याद रखना।
बादल बरसने वाले, आँखों में जब भी छाए;
मेरे साथ भींगने की, बरसात याद रखना।
तुमसे जुदा हो जाऊं, मैं कब ये चाहता था;
काबू में नहीं होते, हालात याद रखना।
ग़मगीन तुम न होना, कभी इन जुदाइयों से;
मैं हूँ तुम्हारे दिल में तेरे साथ याद रखना।
नहीं आ सकूंगा मैं तो, तेरे पास ग़म न करना,
तू अपने मुहब्बत की, सौगात याद रखना।
मेंहदी लगी न तुझको, सेहरा न मैंने बाँधा;
तो क्या हुआ यादों की, बारात याद रखना।
आप आवाज़ यहाँ सुन सकते हैं...
तू मुझको याद रखना/pbchaturvedi/Audio
आप यू-ट्यूब पर यहाँ सुन सकते हैं...
Wednesday, December 19, 2012
डंकन फ़्लेचर क्यों?
Photo from znn.india.com
दोस्तों ! भारतीय क्रिकेट आज जितना
नीचे जा चुका है, वह किसी से छुपा नहीं है। लेकिन मूल कारण क्या है इस पर
चर्चा बहुत ही कम होती है। वह कारण है भारतीय टीम का कोच। भारत ने विदेशी
कोच रखने का जो सिलसिला प्रारम्भ किया है वह कुछ समय के लिये तो ठीक था
परन्तु हमेशा के लिये ठीक नहीं है। सभी विदेशी कोच अच्छी नीयत के साथ भारत
नहीं आते। इसका सबसे बढ़िया उदाहरण ग्रेग चैपल हैं। अपने कोच रहते ग्रेग
चैपल अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि भारत की लुटिया पूरी तरह से डुबो दी
जाए। टीम के सदस्यों में आपसी मनमुटाव को बढ़ावा देना, अच्छे खिलाड़ियों की
गेंदबाजी या बल्लेबाजी बिगाड़ना, भारतीय क्रिकेट को रसातल में ले जाना
इत्यादि ये सभी ग्रेग चैपल की प्राथमिकताएं थी जिसे काफी हद तक उन्होंने
पूरा किया। अब यही काम डंकन फ्लेचर कर रहे हैं। गैरी कर्स्टेन इसके अपवाद
थे और टीम का प्रदर्शन भी उस समय अच्छा था इसलिए वो बच गये। मेरे विचार से
भारत का कोच किसी भारतीय को ही होना चाहिए क्योंकि भारतीय कोच ही यहाँ के
खिलाड़ियों की भावना को और खेल में हार-जीत की वजह से पूरे भारत की जनता की
भावना को समझ सकता है और उसका उपाय ढूंढ सकता है। विदेशी कोच तो बस पैसे के
लिए यहाँ आते हैं और अपना उल्लू सीधा कर चलते बनते हैं, उनकी कोई जवाबदेही
भी नहीं बनती। है कि नहीं ! आप का विचार क्या है ?
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