मित्रों ! जैसे-जैसे समय बीत रहा है हम सभी ब्लागरों को ज्ञान प्राप्त हो रहा है कि कई-कई ब्लागों से अच्छा है एक ही ब्लाग होना। मैंने भी अब केवल दो ब्लाग रखने का फैसला किया है- एक अपनी रचनाओं के लिए और एक भारत के दूसरे विभिन्न रचनाकारों के लिए। अपने अन्य रचनाकारों के लिये मौजूद दो ब्लागों "समकालीन ग़ज़ल" और "बनारस के कवि और शायर" को मिलाकर एक ब्लाग मे समाहित कर मैंने ये ब्लाग "गीत,ग़ज़ल,कविता की दुनिया" बनाया है। सबसे पहले दोनो ब्लागों के पुराने पोस्ट मैंने इस पर पोस्ट किया है। आशा है आप को भी सुविधा होगी......
Saturday, December 15, 2012
Sunday, December 9, 2012
एक रोमांटिक रचना/सुनने के लिए है न सुनाने के लिए है
प्रस्तुत है एक रोमांटिक रचना जिसे मैं पहले भी पोस्ट कर चुका हूँ पर इस बार अपनी आवाज़ में इसे प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा है आप को ये रचना अवश्य भायेगी....
अपनी ये रचना मैं स्वर्गीय मोहम्मद सलीम राही को समर्पित करता हूँ जो आकाशवाणी वाराणसी में कार्यरत थे और एक अच्छे शायर थे। उन्होंने मेरी ग़ज़लों को बहुत सराहा और ये रचना उन्हें बहुत अच्छी लगती थी। इसको उन्हीं की वजह से सेतु [ एक संस्था जिसमें संगीतमय प्रस्तुति होती थी ] में शामिल किया गया था और इसे वहाँ ambika keshari ने अपनी आवाज़ दी थी।
यू-ट्यूब पर सुनने के लिये यहाँ क्लिक करें-
आडियो सुनने के लिये यहाँ क्लिक करें-
http://www.divshare.com/download/21387297-0f7
सुनने के लिए है न सुनाने के लिए है ।
ये बात अभी सबसे छुपाने के लिए है ।
दुनिया के बाज़ार में बेचो न इसे तुम ,
ये बात अभी दिल के खजाने के लिए है ।
इस बात की चिंगारी अगर फ़ैल गयी तो ,
तैयार जहाँ आग लगाने के लिए है ।
आंसू कभी आ जाए तो जाहिर न ये करना ,
ये गम तेरा मुझ जैसे दीवाने के लिए है ।
होता रहा है होगा अभी प्यार पे सितम ,
ये बात जमानों से ज़माने के लिए है ।
तुम प्यार की बातों को जुबां से नहीं कहना ,
ये बात निगाहों से बताने के लिए है ।
अपनी ये रचना मैं स्वर्गीय मोहम्मद सलीम राही को समर्पित करता हूँ जो आकाशवाणी वाराणसी में कार्यरत थे और एक अच्छे शायर थे। उन्होंने मेरी ग़ज़लों को बहुत सराहा और ये रचना उन्हें बहुत अच्छी लगती थी। इसको उन्हीं की वजह से सेतु [ एक संस्था जिसमें संगीतमय प्रस्तुति होती थी ] में शामिल किया गया था और इसे वहाँ ambika keshari ने अपनी आवाज़ दी थी।
यू-ट्यूब पर सुनने के लिये यहाँ क्लिक करें-
आडियो सुनने के लिये यहाँ क्लिक करें-
http://www.divshare.com/download/21387297-0f7
सुनने के लिए है न सुनाने के लिए है ।
ये बात अभी सबसे छुपाने के लिए है ।
दुनिया के बाज़ार में बेचो न इसे तुम ,
ये बात अभी दिल के खजाने के लिए है ।
इस बात की चिंगारी अगर फ़ैल गयी तो ,
तैयार जहाँ आग लगाने के लिए है ।
आंसू कभी आ जाए तो जाहिर न ये करना ,
ये गम तेरा मुझ जैसे दीवाने के लिए है ।
होता रहा है होगा अभी प्यार पे सितम ,
ये बात जमानों से ज़माने के लिए है ।
तुम प्यार की बातों को जुबां से नहीं कहना ,
ये बात निगाहों से बताने के लिए है ।
Friday, August 10, 2012
दर्शन दो प्रभु कबसे खड़े हैं
आप सभी को भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की बहुत-बहुत बधाई। आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर मैं अपना लिखा एक भजन प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह भजन पहले लिखित रूप में आप तक पहुँच चुका है, आज अपनी आवाज़ मे आप तक पहुँचा रहा हूँ...
अगर ऊपर यू ट्यूब में कोई समस्या हो तो इस रिकार्डिंग को आप यहाँ भी देख और सुन सकते हैं...
http://www.youtube.com/watch?v=HWOSBUGICaw&feature=plcp
दर्शन दो प्रभु कबसे खड़े हैं।
हम भारी विपदा में पड़े हैं।
कोई नहीं प्रभु-सा रखवाला,
मेरे कष्ट मिटाने वाला,
जीवन में कर दीजै उजाला;
आप दयालू नाथ बड़े हैं.......
झूठी माया झूठी काया,
लेकर मैं दुनिया में आया,
दुनिया में है पाप समाया;
भरते पाप के रोज़ घड़े हैं........
पाप हटे मिट जाये बुराई,
सबमें पडे़ प्रभु आप दिखाई,
इच्छाओं ने दौड़ लगाई;
कितनी गहरी मन की जड़े है.......
Thursday, July 19, 2012
राग - रामकली
मित्रों ! आइए आपको राग रामकली से परिचय कराता हूँ...
राग - रामकली
थाट- भैरव
जाति- षाडव-वक्र-सम्पूर्ण
वादी- प
संवादी- सा
न्यास-स्वर :- प
आरोह :- सा ग म प, ध नि सां ।
अवरोह :- सां नि ध प, म’ प ध नि ध प, ग म रे सा ।
पकड़ :- म’ प ध नि ध प, ग म रे सा ।
तान स्थायी :-
१. निसा गम पप म’प । धप मग रेसा निसा।
२. निसा गम पध निसा। धनि धप म’ग गम।
३. सांरें सांनि धप धनि । धप मप गम पध । सांनि धप धप म’प। गम पम गरे सा-।
४. गंगं रेंगं गंरें सांनि। धप रेंरें सांरें रेंसां। निनि धप मग रेसा । निसा गग पध मप। गम पप मग रेसा।
तान अन्तरा :-
१. रेंसां रेंसां निध पग। गम’ पध निसां रेंसां।
२. निसा गम पध निसां। रेंगं गंगं रेंसां रेंसां। निध पम’ धनि सां-।
३. म’प धनि धप मप । गम पध सांनि धप । म’प धनि सांनि धप।धनि सांरें गंगं रेंसां। रेंसां धप धनि सां।
Saturday, June 2, 2012
तूने आने में की जो देरी तो
दोस्तों! आज एक रोमांटिक रचना के साथ प्रस्तुत हूँ। यह रचना साहित्यिक नहीं है बल्कि एक साधारण रचना है जो संगीत के साथ ही अच्छी लगेगी। आशा है हमेशा की तरह आप इसे भी जरूर पसन्द करेंगे...
अगर ऊपर यू ट्यूब में कोई समस्या हो तो इस रिकार्डिंग को आप यहाँ भी देख और सुन सकते हैं...
http://www.youtube.com/watch?v=bS5sHa4-rDg&feature=plcp
तूने आने में की जो देरी तो।
याद आने लगेगी तेरी तो।
मैं इल्जाम तुम्हें ही दूंगा,
मेरी दुनिया हुई अंधेरी तो।
ढूंढता हूँ तुझे मंजिल-मंजिल,
ख़त्म होगी कभी ये फेरी तो।
करूँगा और इन्तज़ार अगर,
जान जाने लगेगी मेरी तो।
आजकल फ़ायर फ़ाक्स में यू-ट्यूब काम नहीं कर रहा, इसलिये आप से ये अनुरोध है की आप इसे गूगल क्रोम में देखने का कष्ट करें....
अगर ऊपर यू ट्यूब में कोई समस्या हो तो इस रिकार्डिंग को आप यहाँ भी देख और सुन सकते हैं...
http://www.youtube.com/watch?v=bS5sHa4-rDg&feature=plcp
तूने आने में की जो देरी तो।
याद आने लगेगी तेरी तो।
मैं इल्जाम तुम्हें ही दूंगा,
मेरी दुनिया हुई अंधेरी तो।
ढूंढता हूँ तुझे मंजिल-मंजिल,
ख़त्म होगी कभी ये फेरी तो।
करूँगा और इन्तज़ार अगर,
जान जाने लगेगी मेरी तो।
आजकल फ़ायर फ़ाक्स में यू-ट्यूब काम नहीं कर रहा, इसलिये आप से ये अनुरोध है की आप इसे गूगल क्रोम में देखने का कष्ट करें....
Monday, May 21, 2012
भजन/मेरे तो राधेश्याम रे
दोस्तों, आज एक भजन प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मैनें अपने गुरुजनों से सीखा था और मुझे यह बहुत ही पसन्द है। आशा है आप को भी ये भायेगा...
अगर ऊपर यू ट्यूब में कोई समस्या हो तो इस रिकार्डिंग को आप यहाँ भी सुन सकते हैं...
http://www.divshare.com/download/17815534-360
OR
http://www.youtube.com/watch?v=WKj44m9eWjQ&feature=plcp
आजकल फ़ायर फ़ाक्स में यू-ट्यूब काम नहीं कर रहा, इसलिये आप से ये अनुरोध है की आप इसे गूगल क्रोम में देखने का कष्ट करें....
अगर ऊपर यू ट्यूब में कोई समस्या हो तो इस रिकार्डिंग को आप यहाँ भी सुन सकते हैं...
http://www.divshare.com/download/17815534-360
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http://www.youtube.com/watch?v=WKj44m9eWjQ&feature=plcp
आजकल फ़ायर फ़ाक्स में यू-ट्यूब काम नहीं कर रहा, इसलिये आप से ये अनुरोध है की आप इसे गूगल क्रोम में देखने का कष्ट करें....
Sunday, May 13, 2012
नाराज़गी भी है तुमसे
सभी दोस्तों को नमस्कार ! लीजिए आज पुनः एक रचना अपनी आवाज़ में प्रस्तुत कर रहा हूँ। हालांकि ये किसी स्टूडियो की रिकार्डिंग नही हैं और इसमें गायन, वादन और रिर्कार्डिंग एक साथ हुई है जैसे पुरानी फिल्मों में सारा काम एक साथ होता था, फिर भी आशा है आप को ये पसन्द आयेगी...ये मेरी रचना इसी ब्लाग में आप को पूर्व प्रकाशित मिलेगी। यहाँ केवल तीन अन्तरे ही हैं...
अगर ऊपर यू ट्यूब में कोई समस्या हो तो इस रिकार्डिंग को आप यहाँ भी सुन सकते हैं...
http://www.divshare.com/download/17669250-ad9
OR
http://www.youtube.com/watch?v=FscljyX0bKw&feature=plcp
आजकल फ़ायर फ़ाक्स में यू-ट्यूब काम नहीं कर रहा, इसलिये आप से ये अनुरोध है की आप इसे गूगल क्रोम में देखने का कष्ट करें....
धीरेन्द्र जी की इच्छा है कि मैं आवाज़ के साथ-साथ वह रचना भी पोस्ट कर दूँ...तो लीजिए प्रस्तुत है गाई हुई उक्त रचना...
नाराजगी भी है तुमसे प्यार भी तो है ।
दिल तोड़ने वाले तू मेरा यार भी तो है ।
मुझे बेकरार कर गयी है ये तेरी बेरुखी,
और उसपे सितम ये तू ही करार भी तो है।
जब चाहता हूँ इतना तो क्यों ख़फ़ा न होऊं,
तेरे बिना मेरा जीना दुश्वार भी तो है ।
तुमसे ही मेरी जिन्दगी वीरान हुई है,
तुमसे ही जिन्दगी ये खुशगवार भी तो है।
दोनों के लुत्फ़ हैं यहां इस एक इश्क में,
कुछ जीत भी है इश्क में कुछ हार भी तो है।
वैसे तो मेरा दिल जरूर तुमसे ख़फ़ा है,
तुमको ही ढूंढता ये बार बार भी तो है ।
अब सोच रहा हूँ अपनी नई रचनायें भी ऐसे ही पोस्ट करूँ... आप का क्या ख़याल है....
अगर ऊपर यू ट्यूब में कोई समस्या हो तो इस रिकार्डिंग को आप यहाँ भी सुन सकते हैं...
http://www.divshare.com/download/17669250-ad9
OR
http://www.youtube.com/watch?v=FscljyX0bKw&feature=plcp
आजकल फ़ायर फ़ाक्स में यू-ट्यूब काम नहीं कर रहा, इसलिये आप से ये अनुरोध है की आप इसे गूगल क्रोम में देखने का कष्ट करें....
धीरेन्द्र जी की इच्छा है कि मैं आवाज़ के साथ-साथ वह रचना भी पोस्ट कर दूँ...तो लीजिए प्रस्तुत है गाई हुई उक्त रचना...
नाराजगी भी है तुमसे प्यार भी तो है ।
दिल तोड़ने वाले तू मेरा यार भी तो है ।
मुझे बेकरार कर गयी है ये तेरी बेरुखी,
और उसपे सितम ये तू ही करार भी तो है।
जब चाहता हूँ इतना तो क्यों ख़फ़ा न होऊं,
तेरे बिना मेरा जीना दुश्वार भी तो है ।
तुमसे ही मेरी जिन्दगी वीरान हुई है,
तुमसे ही जिन्दगी ये खुशगवार भी तो है।
दोनों के लुत्फ़ हैं यहां इस एक इश्क में,
कुछ जीत भी है इश्क में कुछ हार भी तो है।
वैसे तो मेरा दिल जरूर तुमसे ख़फ़ा है,
तुमको ही ढूंढता ये बार बार भी तो है ।
अब सोच रहा हूँ अपनी नई रचनायें भी ऐसे ही पोस्ट करूँ... आप का क्या ख़याल है....
Monday, October 10, 2011
जगजीत सिंह- अब तो बस याद ही बाकी है...
एक दर्द, एक आह, एक चुभन, एक कभी न खत्म होने वाला दुख दे गये जगजीत सिंह जी ............। टी वी पर समाचार देखा तो सहसा विश्वास ही नहीं हुआ। पारम्परिक ग़ज़ल-गायकी से हटकर ग़ज़ल को एक नया आयाम देने वाले, ग़ज़ल को एक नई ऊँचाई देने वाले, महान संगीत साधक जगजीत सिंह जी ने दुनिया से कूच करके एक ऐसी रिक्तता दे दी है जिसे भरना शायद नामुमकिन है। अब दूसरा जगजीत सिंह कहाँ मिल सकता है।
मैं अपने जीवन में दो पुरुष गायकों से बहुत प्रभावित रहा- एक तो मुकेश जी और दूसरे जगजीत सिंह जी। सच पूछिए तो मेरा संगीत में रुझान ही इनकी वजह से हुआ। आज मेरे दोनों आदर्श इस दुनिया में नहीं रहे........यकीन नहीं होता। कुछ साल पहले जब जगजीत सिंह जी बनारस आये थे तो उनको सुनने का मौका मिला था। मुझे एक घटना याद आ रही है। कुछ बच्चे उनसे बार -बार आटोग्राफ ले रहे थे और उनकी भीड़ बढ़ती ही जा रही थी। उस समय मैनें उनको बच्चों से शरारत करते हुये देखा था। उन्होंने एक बच्चे से कहा- पैसे लाये हो, तभी आटोग्राफ दूँगा। बच्चे ने कहा- नहीं, पैसे तो नहीं हैं। थोड़ी देर तक बच्चा परेशान रहा फिर उन्होंने हँसते हुये अपना आटोग्राफ दिया। सभी हंसने लगे।
जगजीत सिंह जी के इस दुनिया से जाने के साथ-साथ मेरा भी एक सपना उनके साथ ही चला गया। मैं चाहता था कि मेरी किसी ग़ज़ल को उनकी आवाज़ मिले पर ...............
मेरी ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि..............
मैं अपने जीवन में दो पुरुष गायकों से बहुत प्रभावित रहा- एक तो मुकेश जी और दूसरे जगजीत सिंह जी। सच पूछिए तो मेरा संगीत में रुझान ही इनकी वजह से हुआ। आज मेरे दोनों आदर्श इस दुनिया में नहीं रहे........यकीन नहीं होता। कुछ साल पहले जब जगजीत सिंह जी बनारस आये थे तो उनको सुनने का मौका मिला था। मुझे एक घटना याद आ रही है। कुछ बच्चे उनसे बार -बार आटोग्राफ ले रहे थे और उनकी भीड़ बढ़ती ही जा रही थी। उस समय मैनें उनको बच्चों से शरारत करते हुये देखा था। उन्होंने एक बच्चे से कहा- पैसे लाये हो, तभी आटोग्राफ दूँगा। बच्चे ने कहा- नहीं, पैसे तो नहीं हैं। थोड़ी देर तक बच्चा परेशान रहा फिर उन्होंने हँसते हुये अपना आटोग्राफ दिया। सभी हंसने लगे।
जगजीत सिंह जी के इस दुनिया से जाने के साथ-साथ मेरा भी एक सपना उनके साथ ही चला गया। मैं चाहता था कि मेरी किसी ग़ज़ल को उनकी आवाज़ मिले पर ...............
मेरी ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि..............
Wednesday, November 18, 2009
जीवन की एक महत्वपूर्ण यात्रा
आज आप को अपने जीवन की एक बहुत ही यादगार यात्रा का विवरण देना चाहूँगा।ये यात्रा मात्र नही है बल्कि एक तीर्थयात्रा है जो देश के हर नागरिक को अवश्य करनी चाहिये।यह यात्रा है अमर देशभक्त शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की समाधि और हुसैनीवाला बार्डर पर भारत-पाक सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं द्वारा किये जाने वाले परेड का।सबसे पहले मैं इस यात्रा के संयोजक और अपने अग्रज आदरणीय रमेश सचदेवा जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहूँगा क्योंकि उनकी वजह से ही हम इस पवित्र धरती के दर्शन कर सके वरना हमारे लिये तो ये सपना ही रहता।हमारे साथ-साथ हरियाणा पब्लिक स्कूल मंडी डबवाली और शेरगढ़ के छात्र-छात्रायें भी थे और कुछ विशेष अतिथि भी।मैंने अपनी पत्नी,पुत्री और पुत्र के साथ यह यादगार यात्रा की.......
सबसे पहले हमने १९६५ के युद्ध में पाकिस्तान से जीत के बाद बरामद ये टैंक देखा[देखिये चित्र-१,२,३,४]।
सबसे पहले हमने १९६५ के युद्ध में पाकिस्तान से जीत के बाद बरामद ये टैंक देखा[देखिये चित्र-१,२,३,४]।
अब पहले मैं इस जगह के बारे में बताना चाहूंगा........ [चित्र -५-२३]-
पंजाब के फीरोजपुर जिले में स्थित इस स्थान का ऐतिहासिक महत्व है।भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव को लाहौर में रातों-रात उनके शहीद होने के बाद अंग्रेजों ने उनके मृत शरीर को यहाँ लाकर मिट्टी का तेल छिड़ककर जला दिया।१९६५ में भारत-पाक युद्ध में पाक ने इस जगह कब्जा कर लिया और उनकी मुर्तियों आदि को पाकिस्तान लेकर चले गये।१९७१ के युद्ध में पराजित होने के बाद शिमला-समझौता के अन्तर्गत पुन: ये क्षेत्र भारत के पास आया। इन शहीदों की समाधि के साथ ही शहीद बटुकेश्वर दत्त की भी समाधि है क्योंकि उन्होनें अपनी मृत्यु के बाद यहीं पर अपनी समाधि की इच्छा प्रकट की थी।पास ही शहीद भगत सिंह की माता श्रीमती विदिया वती; जिन्हें १९७३ में पंजाब सरकार ने ‘पंजाब माता’ के खिताब से सम्मानित किया था और जिन्होनें इन शहीदों के साथ ही अपनी समाधि बनाने की इच्छा जताई थी;की समाधि भी उनके स्वर्गवास के बाद १९७४ में बनाई गई।
दर असल यह स्थल आजादी के पहले रेलवे स्टेशन था और लाहौर तक रेलवे मार्ग से जुड़ता था।इस पुराने रेलवे-स्टेशन की दीवारों पर १९६५ के भारत -पाक युद्ध के बीच गोलीबारी के साक्ष्य अब भी देखे जा सकते हैं।
चित्र-२४-२७ -[हुसैनीवाला बार्डर पर भारत-पाक सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं द्वारा किये जाने वाला परेड]-यह भी एक रोचक और गौरवपूर्ण अनुभव था।दोनों ओर के सैनिकों के प्रदर्शन के समय नागरिक अपने-अपने देश के सैनिकों का उत्साहवर्द्धन कर रहे थे।कभी-कभी तो माहौल में वीर-रस का इतना प्रभाव हो जाता था कि हर कोई अपने को सैनिक अनुभव कर रहा था।वाह.....इस अनुभव को बस महसूस किया जा सकता है.....
पंजाब के फीरोजपुर जिले में स्थित इस स्थान का ऐतिहासिक महत्व है।भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव को लाहौर में रातों-रात उनके शहीद होने के बाद अंग्रेजों ने उनके मृत शरीर को यहाँ लाकर मिट्टी का तेल छिड़ककर जला दिया।१९६५ में भारत-पाक युद्ध में पाक ने इस जगह कब्जा कर लिया और उनकी मुर्तियों आदि को पाकिस्तान लेकर चले गये।१९७१ के युद्ध में पराजित होने के बाद शिमला-समझौता के अन्तर्गत पुन: ये क्षेत्र भारत के पास आया। इन शहीदों की समाधि के साथ ही शहीद बटुकेश्वर दत्त की भी समाधि है क्योंकि उन्होनें अपनी मृत्यु के बाद यहीं पर अपनी समाधि की इच्छा प्रकट की थी।पास ही शहीद भगत सिंह की माता श्रीमती विदिया वती; जिन्हें १९७३ में पंजाब सरकार ने ‘पंजाब माता’ के खिताब से सम्मानित किया था और जिन्होनें इन शहीदों के साथ ही अपनी समाधि बनाने की इच्छा जताई थी;की समाधि भी उनके स्वर्गवास के बाद १९७४ में बनाई गई।
दर असल यह स्थल आजादी के पहले रेलवे स्टेशन था और लाहौर तक रेलवे मार्ग से जुड़ता था।इस पुराने रेलवे-स्टेशन की दीवारों पर १९६५ के भारत -पाक युद्ध के बीच गोलीबारी के साक्ष्य अब भी देखे जा सकते हैं।
चित्र-२४-२७ -[हुसैनीवाला बार्डर पर भारत-पाक सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं द्वारा किये जाने वाला परेड]-यह भी एक रोचक और गौरवपूर्ण अनुभव था।दोनों ओर के सैनिकों के प्रदर्शन के समय नागरिक अपने-अपने देश के सैनिकों का उत्साहवर्द्धन कर रहे थे।कभी-कभी तो माहौल में वीर-रस का इतना प्रभाव हो जाता था कि हर कोई अपने को सैनिक अनुभव कर रहा था।वाह.....इस अनुभव को बस महसूस किया जा सकता है.....
Friday, August 21, 2009
बनारस में एक कवि गोष्ठी
दिनांक 20-08-09 को वाराणसी में नई दिल्ली से पधारे श्री अमित दहिया ‘बादशाह’,कुलदीप खन्ना,सुश्री शिखा खन्ना,विकास आदि की उपस्थिति में श्री उमाशंकर चतुर्वेदी‘कंचन’ के निवास स्थान पर एक काव्य-गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें इनके और मेरे अतिरिक्त देवेन्द्र पाण्डेय,नागेश शाण्डिल्य,विन्ध्याचल पाण्डेय, ,शिवशंकर ‘बाबा’,अख्तर बनारसी आदि कवि मित्रों ने भाग लेकर काव्य-गोष्ठी को एक ऊचाँई प्रदान की।प्रस्तुत काव्य-गोष्ठी के कुछ चित्र मेरे ब्लॉग 'कुछ हमसे सुनो कुछ हमसे कहो' पर देंखे ....
कुलदीप खन्ना,देवेन्द्र पांडे,अमित दहिया'बादशाह' उमाशंकर चतुर्वेदी'कंचन'
शिखा खन्ना और विकास
उमाशंकर चतुर्वेदी'कंचन',विंध्याचल पाण्डेय,प्रसन्न वदन चतुर्वेदी और शिवशंकर 'बाबा'
शिखा खन्ना और विकास
कुलदीप खन्ना,देवेन्द्र पांडे,
देवेन्द्र पांडे,अमित दहिया'बादशाह'
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